भारत मे यूरेनियम की सबसे बड़ी खदान कहाँ है?

आंध्र प्रदेश के तुममालपल्ले में दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार हो सकता है। हाल के अध्ययनों ने संकेत दिया है कि इसमें 1.5 लाख टन दुर्लभ सामग्री हो सकती है।
अध्ययनों से पहले ही पता चला है कि इस क्षेत्र में 49,000 टन की पुष्टि की गई थी और हाल के सर्वेक्षणों ने संकेत दिया था कि यह आंकड़ा तीन गुना तक बढ़ सकता है।
तुममालपल्ले में यूरेनियम का भंडार 35 किमी तक फैला हुआ दिखाई दिया। खोजपूर्ण काम चल रहे हैं। वर्तमान में, देश में इसके अलावा कुल 1,75,000 टन यूरेनियम का भंडार होने का अनुमान है।

Bharat me uranium ki sabse badi khadan kaha hai


विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी भंडार अभी भी देश के परमाणु कार्यक्रम की संपूर्ण मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। नए निष्कर्ष केवल यूरेनियम की स्वदेशी आपूर्ति में वृद्धि करेंगे। अभी भी एक महत्वपूर्ण अंतर होगा। भारत को अभी भी आयात करना होगा।
देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा नितांत आवश्यक है। यदि अर्थव्यवस्था को प्रति वर्ष 9 प्रतिशत की दर से बढ़ना है, तो हमें बिजली उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता है। हम परमाणु ऊर्जा के बिना नहीं कर सकते।

अन्य जानकारी

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर जिले के तुममलपल्ले में भारत की सबसे नई भूमिगत यूरेनियम खदान गतिविधि का एक छत्ता है। (कडप्पा जिले का नाम मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की याद में 2010 में वाईएसआर जिला रखा गया था, जिनकी हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई।) यह पुल पुलिवेंदुला, वाईएसआर के गृहनगर से 12 किलोमीटर और राज्य की राजधानी हैदराबाद से 500 किलोमीटर दूर स्थित है। खदान से सटे एक मिल, या एक प्रोसेसिंग प्लांट है, जहां यूरेनियम अयस्क को सोडियम डाइयुरनेट, या पीले केक में परिवर्तित किया जाता है।
तुम्मालपल्ले में, प्राकृतिक युरेनियम युक्त मेजबान चट्टान डोलोमाइट है, जिसकी कैल्शियम-मैग्नीशियम-कार्बोनेट सामग्री अधिक है। हालांकि 1986 में Tummalapalle डिपॉजिट की खोज की गई थी, लेकिन UCIL अपने निम्न ग्रेड और जटिल प्रकृति के कारण अयस्क की खान और प्रसंस्करण नहीं कर सका। इसकी रचना झारखंड में सिंहभूम बेल्ट में पाए जाने वाले अयस्क से भिन्न है।

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